"BADE ACHCHE LAGTE HAIN"
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इक बात कहुँ जी सुनते हो तुम मुझको अच्छे लगते हो
हैं चाहने वाले और बहुत
पर तुझमे है कुछ बात अलग
तुम अपने अपने लगते हो
इक बात कहुँ जी सुनते हो तुम मुझको अच्छे लगते हो !!!
ये बात बात पे खो जाना
कुछ कहते कहते रुक जाना
क्या बात है हमसे कह डालो
यूं किस उलझन में रहते हो
इक बात कहुँ जी सुनते हो
तुम मुझको अच्छे लगते हो!!!
यूँ रूठो न मुझसे हमदम
तूम साथ रहो मेरे हरदम
जो भी शिकवे हैं कर डालो यूं क्यों परदे में रहते हो
इक बात कहुँ जी सुनते हो तुम मुझको अच्छे लगते हो!!!
तेरे साथ जियूंगा मैं
मरना तेरे साथ मुझे
हैं दिल में अल्फाज बहुत पर कुछ कहना तेरे साथ मुझे
लाख दगा की मैने तुझ संग
छोड़ भी अब माफी दे डालो
यूँ क्यों गुमसुम से रहते हो
इक बात कहुँ जी सुनते हो तुम मुझको अच्छे लगते हो!!!
बस क्या यही हमारा रिश्ता था
जो मेरे दिल का इक हिस्सा था
मैं मर जाऊंगा उस धड़कन के बिन
गर तुम वो हिस्सा लेते जाते हो
इक बात कहुँ जी सुनते हो तुम मुझको अच्छे लगते हो!!!!
ये "अनुराग" जरा सा रहम करो
दिल की तक़रीर पर अमल करो ये सम्पूर्ण नहीं रहता तुम बिन
गर तुम इसमें से जाते हो
इक बात कहुँ जी सुनते हो तुम मुझको अच्छे लगते हो !!!!
इक बात कहुँ जी सुनते हो तुम मुझको अच्छे लगते हो !!!!





nice poems
ReplyDeleteJi
ReplyDeleteGood poem.... Must read
ReplyDeleteThanks bro
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